Sunday, August 26, 2012


कुछ नया नहीं हैं मेरी ज़िन्दगी में शामिल




कुछ नया नहीं हैं मेरी ज़िन्दगी में शामिल
स‌च कहूं तो तू पूरानी होती ही नहीं

नशा जो तेरी आंखो के प्यालों में था
इस जहां की कोई जाम वो मज़ा देती नहीं

तूझसे घंटो की वो बाते जो स‌ुकूं देती थी
तेरे लफ़्ज़ो स‌े प्यारी कोई धुन लगती नहीं

तेरी खुशबू जैसे फूलों का कोई स‌ागर हो
वो महक इस ज़हन स‌े क्यों जाती नहीं

तू हंसे तो ज़माना भी खुश लगता था
वो गूंज मेरे कानो से हटती ही नहीं

ये पता है मुझे तू अब नहीं है लेकिन
तेरे आने की आस फिर भी जाती ही नहीं


कुछ नया नहीं हैं मेरी ज़िन्दगी में शामिल
स‌च कहूं तो तू पूरानी होती ही नहीं


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